नमाज़ क्यों अहम है
إِنَّ ٱلصَّلَوٰةَ كَانَتْ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ كِتَٰبًا مَّوْقُوتًا
निश्चय ही नमाज़ ईमान वालों पर निर्धारित समय पर फ़र्ज़ की गई है।
नमाज़ हर उस मुसलमान पर फ़र्ज़ है जो समझदार और बालिग़ हो। बच्चों को सात साल की उम्र से सिखाई जाती है। माहवारी और निफ़ास के दौरान महिलाओं को छूट है और वे उन नमाज़ों की क़ज़ा नहीं करतीं। नबी ﷺ ने फ़रमाया: “क़ियामत के दिन बंदे से सबसे पहले नमाज़ का हिसाब लिया जाएगा।” (सुनन नसाई 465, जामे तिर्मिज़ी 413)
नमाज़ की शर्तें
ये नमाज़ शुरू होने से पहले पूरी होनी चाहिए और पूरी नमाज़ में बनी रहनी चाहिए।
- हदस से पाकी — वुज़ू होना, और ज़रूरत हो तो ग़ुस्ल
- शरीर, कपड़े और जगह का पाक होना — नजासत से मुक्त
- सतर ढकना — पुरुषों के लिए नाभि से घुटनों तक; महिलाओं के लिए चेहरे और हाथों (हनफ़ी मसलक में पैरों) के अलावा पूरा शरीर
- वक़्त का होना — हर नमाज़ का अपना समय है
- क़िबला की ओर मुँह — मक्का में काबा की दिशा
- नीयत — दिल में, उसी नमाज़ के लिए
वुज़ू
नबी ﷺ जिस तरह वुज़ू करते थे, उसकी सुन्नतों के साथ।
- 1
नीयत और बिस्मिल्लाह
दिल में वुज़ू की नीयत करें और “बिस्मिल्लाह” कहें।
- 2
हाथ धोएँ
दोनों हाथ कलाई तक तीन बार धोएँ, उँगलियों के बीच भी।
- 3
कुल्ली करें
मुँह में पानी लेकर तीन बार कुल्ली करें।
- 4
नाक में पानी डालें
नाक में पानी चढ़ाएँ और बाएँ हाथ से निकालें, तीन बार।
- 5
चेहरा धोएँ
माथे के बालों से ठोड़ी के नीचे तक और एक कान से दूसरे कान तक, तीन बार।
- 6
बाज़ू धोएँ
पहले दायाँ फिर बायाँ, उँगलियों से कोहनियों समेत, तीन बार।
- 7
सिर और कानों का मसह
गीले हाथ सिर पर आगे से पीछे और फिर वापस फेरें, फिर कानों के अंदर और बाहर मसह करें।
- 8
पैर धोएँ
पहले दायाँ फिर बायाँ, टख़नों समेत, उँगलियों के बीच, तीन बार।
- 9
गवाही दें
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
Ashhadu an la ilaha illallahu wahdahu la sharika lah, wa ashhadu anna Muhammadan 'abduhu wa rasuluh
जो वुज़ू के बाद यह पढ़े, उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं (सहीह मुस्लिम 234)।
चार: चेहरा धोना, कोहनियों समेत बाज़ू धोना, सिर के चौथाई हिस्से का मसह, टख़नों समेत पैर धोना।
छह: नीयत, चेहरा, बाज़ू, सिर के कुछ हिस्से का मसह, पैर, और तरतीब।
सात: नीयत, चेहरा, बाज़ू, पूरे सिर का मसह, पैर, लगातार करना (मुवालात) और मलना (दल्क)।
छह: चेहरा (मुँह और नाक समेत), बाज़ू, कानों समेत पूरे सिर का मसह, पैर, तरतीब और लगातार करना; नीयत शर्त है।
वुज़ू किन चीज़ों से टूटता है
| कारण | हुक्म |
|---|---|
| आगे या पीछे के रास्ते से कुछ भी निकलना (पेशाब, पाख़ाना, हवा) | वुज़ू टूट जाता है — सर्वसम्मत |
| गहरी नींद, बेहोशी, नशा, होश खो देना | वुज़ू टूट जाता है — सर्वसम्मत |
| बहता ख़ून, पीप या मुँह भर उल्टी | हनफ़ी मसलक में वुज़ू टूट जाता है; हंबली में भी, अगर अधिक हो |
| गुप्तांग को सीधे छूना | शाफ़ई और हंबली के अनुसार वुज़ू टूटता है; मालिकी में शर्तों के साथ; हनफ़ी में नहीं |
| विपरीत लिंग की त्वचा को छूना | शाफ़ई: वुज़ू टूटता है; मालिकी और हंबली: केवल शहवत के साथ; हनफ़ी: नहीं टूटता |
| नमाज़ के अंदर ज़ोर से हँसना | हनफ़ी मसलक में वुज़ू और नमाज़ दोनों टूट जाते हैं |
| ऊँट का गोश्त खाना | हंबली मसलक में वुज़ू टूट जाता है |
नमाज़ के समय
| नमाज़ | शुरू | समाप्त |
|---|---|---|
| फ़ज्र | सुबह-ए-सादिक़ | सूर्योदय |
| ज़ुहर | सूरज के ढलने के ठीक बाद | जब किसी चीज़ की छाया उसकी लंबाई के बराबर हो जाए (हनफ़ी मसलक में दोगुनी), दोपहर की छाया के अलावा |
| अस्र | ज़ुहर का अंत | सूर्यास्त — सूरज पीला पड़ने तक देर करना मकरूह है |
| मग़रिब | सूर्यास्त | लाल शफ़क़ का ग़ायब होना (इमाम अबू हनीफ़ा के अनुसार सफ़ेद शफ़क़) |
| इशा | मग़रिब का अंत | सुबह-ए-सादिक़ — बेहतर समय आधी रात से पहले है |
सूरज निकलते, ठीक दोपहर और डूबते समय, और फ़ज्र व अस्र की नमाज़ के बाद नफ़्ल नमाज़ नहीं पढ़ी जाती। बहुमत के अनुसार छूटी हुई फ़र्ज़ नमाज़ों की क़ज़ा इन समयों में की जा सकती है, सिवाय हनफ़ी मसलक के, जो उन तीन क्षणों में नहीं करता।
हर नमाज़ की रकअतें
सुन्नत-ए-मुअक्कदा दिखाई गई हैं। अस्र से पहले चार और इशा से पहले दो सुन्नतें ऐच्छिक हैं। शाफ़ई और हंबली ज़ुहर से पहले दो मुअक्कदा रकअतें गिनते हैं।
| नमाज़ | पहले की सुन्नत | फ़र्ज़ | बाद की सुन्नत | क़िरात |
|---|---|---|---|---|
| फ़ज्र | 2 | 2 | — | ज़ोर से |
| ज़ुहर | 4 (हनफ़ी) / 2 | 4 | 2 | आहिस्ता |
| अस्र | 4 (ऐच्छिक) | 4 | — | आहिस्ता |
| मग़रिब | — | 3 | 2 | पहली दो में ज़ोर से |
| इशा | 4 (ऐच्छिक) | 4 | 2 + वित्र | पहली दो में ज़ोर से |
| जुमा | 4 (हनफ़ी) / 2 | 2 | 4 या 2 | ज़ोर से |
वाजिब। एक सलाम के साथ तीन रकअतें, दूसरी के बाद बैठना, और तीसरी के रुकू से पहले क़ुनूत।
सुन्नत-ए-मुअक्कदा। कम से कम एक रकअत, आमतौर पर तीन (दो फिर एक), ग्यारह तक।
सुन्नत-ए-मुअक्कदा। एक रकअत, जिससे पहले दो रकअत की जुफ़्त नमाज़ (शफ़) हो।
सुन्नत-ए-मुअक्कदा। कम से कम एक, बेहतर ग्यारह; आख़िरी रकअत में रुकू के बाद क़ुनूत।
नमाज़ कैसे पढ़ें, क़दम-ब-क़दम
फ़ज्र जैसी दो रकअत की नमाज़। तीन या चार रकअतों के लिए पहले तशह्हुद के बाद खड़े होकर जारी रखें, और अतिरिक्त रकअतों में केवल अल-फ़ातिहा पढ़ें।
- 1
नीयत
क़िबला की ओर मुँह करें और दिल में उसी नमाज़ की नीयत करें।
- 2
तकबीर-ए-तहरीमा
ٱللَّهُ أَكْبَرُ
Allahu akbar
हाथ उठाएँ और तकबीर कहें। अब आप नमाज़ में दाख़िल हो गए।
- 3
क़ियाम और सना
سُبْحَانَكَ ٱللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ ٱسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ
Subhanaka Allahumma wa bihamdika, wa tabaraka-smuka, wa ta'ala jadduka, wa la ilaha ghayruk
दायाँ हाथ बाएँ पर रखें और आहिस्ता सना पढ़ें।
- 4
तअव्वुज़ और अल-फ़ातिहा
أَعُوذُ بِٱللَّهِ مِنَ ٱلشَّيْطَٰنِ ٱلرَّجِيمِ — بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
A'udhu billahi minash-shaytanir-rajim. Bismillahir-Rahmanir-Rahim
सूरह अल-फ़ातिहा पढ़ें, “आमीन” कहें, फिर पहली दो रकअतों में कोई और सूरह या कुछ आयतें पढ़ें।
- 5
रुकू
سُبْحَانَ رَبِّيَ ٱلْعَظِيمِ
Subhana Rabbiyal-'Azim (3×)
“अल्लाहु अकबर” कहें, पीठ सीधी रखकर झुकें और हाथ घुटनों पर रखें।
- 6
रुकू से उठना
سَمِعَ ٱللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ — رَبَّنَا وَلَكَ ٱلْحَمْدُ
Sami'allahu liman hamidah. Rabbana wa lakal-hamd
पूरी तरह सीधे खड़े होकर ठहरें।
- 7
सज्दा
سُبْحَانَ رَبِّيَ ٱلْأَعْلَىٰ
Subhana Rabbiyal-A'la (3×)
“अल्लाहु अकबर” कहें और सात अंगों पर सज्दा करें: नाक समेत माथा, दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने और दोनों पैरों की उँगलियाँ।
- 8
दो सज्दों के बीच बैठना
رَبِّ ٱغْفِرْ لِي
Rabbighfir li
इत्मीनान से बैठें, फिर दूसरा सज्दा करें। इससे एक रकअत पूरी होती है।
- 9
दूसरी रकअत
“अल्लाहु अकबर” कहकर खड़े हों और अल-फ़ातिहा से दोनों सज्दों तक दोहराएँ।
- 10
तशह्हुद
ٱلتَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَٱلصَّلَوَاتُ وَٱلطَّيِّبَاتُ، ٱلسَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا ٱلنَّبِيُّ وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، ٱلسَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ ٱللَّهِ ٱلصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat. As-salamu 'alayka ayyuhan-nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. As-salamu 'alayna wa 'ala 'ibadillahis-salihin. Ashhadu an la ilaha illallah, wa ashhadu anna Muhammadan 'abduhu wa rasuluh
दूसरे सज्दे के बाद बैठें और तशह्हुद पढ़ें।
- 11
नबी ﷺ पर दुरूद
ٱللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، ٱللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
आख़िरी बैठक में तशह्हुद के बाद दुरूद-ए-इब्राहीमी और एक दुआ पढ़ें।
- 12
सलाम के साथ समाप्ति
ٱلسَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ ٱللَّهِ
As-salamu 'alaykum wa rahmatullah
सिर पहले दाईं ओर, फिर बाईं ओर फेरें।
मसलकों के बीच अंतर
चारों मसलक अहल-ए-सुन्नत के भीतर सही रास्ते हैं। जिस मसलक की आपको तालीम मिली है या जो आपके समुदाय में प्रचलित है, उसका पालन करें।
केवल तकबीर-ए-तहरीमा पर।
तकबीर-ए-तहरीमा पर, रुकू से पहले और बाद में, और पहले तशह्हुद से खड़े होते समय।
तकबीर-ए-तहरीमा पर (मोतबर राय)।
तकबीर-ए-तहरीमा पर और रुकू से पहले और बाद में।
पुरुष नाभि के नीचे; महिलाएँ सीने पर।
सीने के नीचे और नाभि के ऊपर।
फ़र्ज़ नमाज़ों में हाथ छोड़कर (सदल); नफ़्ल में बाँधना जायज़ है।
नाभि के नीचे।
मुक़्तदी सुनता है और नहीं पढ़ता।
मुक़्तदी पर हर रकअत में फ़र्ज़।
आहिस्ता नमाज़ों में मुस्तहब; जब इमाम ज़ोर से पढ़े तो नहीं पढ़ी जाती।
आहिस्ता नमाज़ों में और इमाम के ठहराव के दौरान मुस्तहब।
फ़ज्र में नहीं; क़ुनूत वित्र में है।
फ़ज्र की दूसरी रकअत में रुकू के बाद सुन्नत।
फ़ज्र में रुकू से पहले आहिस्ता मुस्तहब।
मुसीबत के समय के अलावा फ़ज्र में नहीं; क़ुनूत वित्र में है।
नमाज़ किन चीज़ों से टूटती है
- जान-बूझकर बोलना, थोड़ा भी (शाफ़ई और अन्य के अनुसार अनजाने में बोलना माफ़ है)
- खाना या पीना
- नमाज़ से असंबंधित अधिक हरकत
- वुज़ू टूट जाना
- बिना मजबूरी सीना क़िबला से फेर लेना
- किसी रुक्न या शर्त को छोड़ देना
- ज़ोर से हँसना
- काफ़ी देर तक सतर खुल जाना
सज्दा-ए-सहव
सज्दा-ए-सहव दो अतिरिक्त सज्दे हैं जो भूल से हुई कमी, बढ़ोतरी या शक की भरपाई करते हैं।
आख़िरी तशह्हुद के बाद: दाईं ओर एक सलाम, दो सज्दे, फिर तशह्हुद, दुरूद और आख़िरी सलाम।
आख़िरी सलाम से पहले, तशह्हुद और दुरूद के बाद।
कमी पर सलाम से पहले; बढ़ोतरी पर सलाम के बाद।
आमतौर पर सलाम से पहले; भूल से जल्दी समाप्त करने पर सलाम के बाद।
अगर शक हो कि तीन रकअत पढ़ीं या चार, तो कम संख्या को आधार बनाएँ और सज्दा-ए-सहव करें (सहीह मुस्लिम 571)।
अन्य नमाज़ें
जुमा (शुक्रवार)
ख़ुत्बे के बाद जमाअत के साथ दो रकअतें, ज़ुहर की जगह। बालिग़, मुक़ीम पुरुषों पर फ़र्ज़।
ईद की नमाज़ें
ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा पर अतिरिक्त तकबीरों के साथ दो रकअतें। हनफ़ी के अनुसार वाजिब; दूसरों के अनुसार सुन्नत-ए-मुअक्कदा।
जनाज़ा
खड़े होकर चार तकबीरें, बिना रुकू और सज्दे के: अल-फ़ातिहा (या सना), दुरूद, मय्यत के लिए दुआ, फिर सलाम।
तरावीह
रमज़ान में रात की नमाज़, दो-दो रकअत करके। चारों मसलकों में बीस रकअतें; आठ भी पढ़ी जाती हैं।
तहज्जुद और चाश्त
सोकर उठने के बाद रात की नमाज़, बेहतर रात के आख़िरी तिहाई में; चाश्त (ज़ुहा) सुबह के मध्य से दोपहर से पहले तक।
इस्तिख़ारा
किसी जायज़ फ़ैसले से पहले दो नफ़्ल रकअतें और फिर मार्गदर्शन माँगने की दुआ।
लगभग 77 किमी या अधिक के सफ़र में चार रकअत वाली नमाज़ों को दो पढ़ना वाजिब है। जमा केवल अरफ़ात और मुज़दलिफ़ा में।
लगभग 81 किमी या अधिक के सफ़र में क़स्र और जमा (ज़ुहर के साथ अस्र, मग़रिब के साथ इशा) जायज़ हैं।
लगभग 80 किमी या अधिक के लिए क़स्र सुन्नत-ए-मुअक्कदा है; जमा जायज़ है।
लगभग 81 किमी या अधिक के लिए क़स्र बेहतर है; जमा जायज़ है।
ग़ुस्ल और तयम्मुम
ग़ुस्ल (पूरा स्नान)
- 1
नीयत करें और बिस्मिल्लाह कहें
संभोग, वीर्य निकलने, माहवारी या निफ़ास समाप्त होने के बाद ज़रूरी।
- 2
हाथ और गुप्तांग धोएँ
कोई भी नजासत हटाएँ।
- 3
वुज़ू करें
नमाज़ जैसा वुज़ू; पैर आख़िर में धोए जा सकते हैं।
- 4
पूरे शरीर पर पानी बहाएँ
सिर पर तीन बार, फिर दाईं और बाईं ओर, ताकि पानी पूरी त्वचा और बालों की जड़ों तक पहुँचे। हनफ़ी कुल्ली और नाक में पानी डालना भी ज़रूरी मानते हैं।
तयम्मुम
- 1
कब जायज़ है
जब पानी न मिले या उसके इस्तेमाल से नुक़सान हो।
- 2
पाक मिट्टी पर हाथ मारें
नीयत के साथ दोनों हथेलियाँ पाक मिट्टी या धूल पर मारें।
- 3
चेहरे और हाथों का मसह
चेहरे का, फिर हाथों का मसह करें (हनफ़ी और शाफ़ई के अनुसार कोहनियों तक)।
सवाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर कोई नमाज़ छूट जाए तो?
छूटी हुई फ़र्ज़ नमाज़ की जल्द से जल्द क़ज़ा करनी चाहिए, और अगर बिना मजबूरी छूटी हो तो तौबा भी।
क्या अरबी के अलावा किसी दूसरी भाषा में नमाज़ पढ़ सकते हैं?
नमाज़ की क़िरात और तय शब्द अरबी में हैं। शुरुआत करने वाले पहले अल-फ़ातिहा सीखें; नमाज़ के बाहर निजी दुआएँ किसी भी भाषा में हो सकती हैं।
मुझे कौन सा मसलक मानना चाहिए?
चारों सुन्नी मसलकों में से कोई भी। अधिकतर लोग अपने समुदाय या उस्ताद के मसलक का पालन करते हैं और उसी पर क़ायम रहते हैं।
महिलाएँ नमाज़ कैसे पढ़ें?
महिलाएँ भी इसी तरह पढ़ती हैं, मसलकों में दर्ज कुछ अंतरों के साथ (जैसे रुकू और सज्दे में शरीर को अधिक समेटकर रखना)। जमाअत की नमाज़ महिलाओं पर फ़र्ज़ नहीं है।