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Sunni Islam मार्गदर्शन, इबादत के टूल और प्रामाणिक स्रोत

सूरह 37 · मक्की · 182 आयतें

सूरह अस-साफ़्फ़ात

पंक्तिबद्ध

سورة الصافات
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. 1

    وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّۭا

    (इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम)

  2. 2

    فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًۭا

    फिर (बदों को बुराई से) झिड़क कर डाँटने वाले की (क़सम)

  3. 3

    فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكْرًا

    फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम है

  4. 4

    إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌۭ

    तुम्हारा माबूद (यक़ीनी) एक ही है

  5. 5

    رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَٰرِقِ

    जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है

  6. 6

    إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ

    और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया

  7. 7

    وَحِفْظًۭا مِّن كُلِّ شَيْطَٰنٍۢ مَّارِدٍۢ

    और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)

  8. 8

    لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍۢ

    कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं

  9. 9

    دُحُورًۭا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌۭ وَاصِبٌ

    और उनके लिए पाएदार अज़ाब है

  10. 10

    إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ ثَاقِبٌۭ

    मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है

  11. 11

    فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ ۚ إِنَّا خَلَقْنَٰهُم مِّن طِينٍۢ لَّازِبٍۭ

    तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया

  12. 12

    بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ

    बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं

  13. 13

    وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ

    और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं

  14. 14

    وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةًۭ يَسْتَسْخِرُونَ

    और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं

  15. 15

    وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌ

    और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है

  16. 16

    أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ

    भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे

  17. 17

    أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ

    तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे

  18. 18

    قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ

    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)

  19. 19

    فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ

    और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे

  20. 20

    وَقَالُوا۟ يَٰوَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ

    और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है

  21. 21

    هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ

    (जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे

  22. 22

    ۞ ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ

    (और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं

  23. 23

    مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْجَحِيمِ

    उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ

  24. 24

    وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْـُٔولُونَ

    और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है

  25. 25

    مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ

    (अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते

  26. 26

    بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ

    (जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं

  27. 27

    وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ

    और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे

  28. 28

    قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ

    (और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे

  29. 29

    قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ

    वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे

  30. 30

    وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَٰنٍۭ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًۭا طَٰغِينَ

    और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे

  31. 31

    فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ

    फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे

  32. 32

    فَأَغْوَيْنَٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَٰوِينَ

    हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया

  33. 33

    فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍۢ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ

    ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें

  34. 34

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ

    और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे

  35. 35

    إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ

    कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे

  36. 36

    وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍۢ مَّجْنُونٍۭ

    और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)

  37. 37

    بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है

  38. 38

    إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ

    तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे

  39. 39

    وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

    और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे

  40. 40

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे

  41. 41

    أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌۭ مَّعْلُومٌۭ

    उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी

  42. 42

    فَوَٰكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ

    (और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे

  43. 43

    فِى جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ

    और वह लोग बड़ी इज्ज़त से नेअमत के (लदे हुए)

  44. 44

    عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَٰبِلِينَ

    बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे

  45. 45

    يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۭ

    उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा

  46. 46

    بَيْضَآءَ لَذَّةٍۢ لِّلشَّٰرِبِينَ

    जो पीने वालों को बड़ा मज़ा देगी

  47. 47

    لَا فِيهَا غَوْلٌۭ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ

    (और फिर) न उस शराब में ख़ुमार की वजह से) दर्द सर होगा और न वह उस (के पीने) से मतवाले होंगे

  48. 48

    وَعِندَهُمْ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌۭ

    और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली बड़ी बड़ी ऑंखों वाली परियाँ होगी

  49. 49

    كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌۭ مَّكْنُونٌۭ

    (उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्ख़ी ऐसी झलकती होगी

  50. 50

    فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ

    गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो

  51. 51

    قَالَ قَآئِلٌۭ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌۭ

    फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था

  52. 52

    يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ

    और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो

  53. 53

    أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ

    (भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा

  54. 54

    قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ

    (फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)

  55. 55

    فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ

    तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा

  56. 56

    قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ

    (ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे

  57. 57

    وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ

    और अगर मेरे परवरदिगार का एहसान न होता तो मैं भी (इस वक्त) तेरी तरह जहन्नुम में गिरफ्तार किया गया होता

  58. 58

    أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ

    (अब बताओ) क्या (मैं तुम से न कहता था) कि हम को इस पहली मौत के सिवा फिर मरना नहीं है

  59. 59

    إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ

    और न हम पर (आख़ेरत) में अज़ाब होगा

  60. 60

    إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ

    (तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है

  61. 61

    لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَٰمِلُونَ

    ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए

  62. 62

    أَذَٰلِكَ خَيْرٌۭ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ

    भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)

  63. 63

    إِنَّا جَعَلْنَٰهَا فِتْنَةًۭ لِّلظَّٰلِمِينَ

    जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है

  64. 64

    إِنَّهَا شَجَرَةٌۭ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ

    ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है

  65. 65

    طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَٰطِينِ

    उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे

  66. 66

    فَإِنَّهُمْ لَءَاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ

    फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे

  67. 67

    ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًۭا مِّنْ حَمِيمٍۢ

    फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा

  68. 68

    ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ

    फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा

  69. 69

    إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ

    उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था

  70. 70

    فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ

    ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं

  71. 71

    وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ

    और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके

  72. 72

    وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ

    उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था

  73. 73

    فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ

    ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ

  74. 74

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)

  75. 75

    وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌۭ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ

    और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे

  76. 76

    وَنَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ

    और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

  77. 77

    وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ

    और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा

  78. 78

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा

  79. 79

    سَلَٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍۢ فِى ٱلْعَٰلَمِينَ

    कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है

  80. 80

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

  81. 81

    إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे

  82. 82

    ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْءَاخَرِينَ

    फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया

  83. 83

    ۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ

    और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे

  84. 84

    إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍ

    जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था

  85. 85

    إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ

    जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो

  86. 86

    أَئِفْكًا ءَالِهَةًۭ دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ

    क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो

  87. 87

    فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

    फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है

  88. 88

    فَنَظَرَ نَظْرَةًۭ فِى ٱلنُّجُومِ

    फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा

  89. 89

    فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌۭ

    और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ

  90. 90

    فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ

    तो वह लोग इबराहीम के पास से पीठ फेर फेर कर हट गए

  91. 91

    فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ

    (बस) फिर तो इबराहीम चुपके से उनके बुतों की तरफ मुतावज्जे हुए और (तान से) कहा तुम्हारे सामने इतने चढ़ाव रखते हैं

  92. 92

    مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ

    आख़िर तुम खाते क्यों नहीं (अरे तुम्हें क्या हो गया है)

  93. 93

    فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ

    कि तुम बोलते तक नहीं

  94. 94

    فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ

    फिर तो इबराहीम दाहिने हाथ से मारते हुए उन पर पिल पड़े (और तोड़-फोड़ कर एक बड़े बुत के गले में कुल्हाड़ी डाल दी)

  95. 95

    قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ

    जब उन लोगों को ख़बर हुई तो इबराहीम के पास दौड़ते हुए पहुँचे

  96. 96

    وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ

    इबराहीम ने कहा (अफ़सोस) तुम लोग उसकी परसतिश करते हो जिसे तुम लोग खुद तराश कर बनाते हो

  97. 97

    قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَٰنًۭا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ

    हालाँकि तुमको और जिसको तुम लोग बनाते हो (सबको) खुदा ही ने पैदा किया है (ये सुनकर) वह लोग (आपस में कहने लगे) इसके लिए (भट्टी की सी) एक इमारत बनाओ

  98. 98

    فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًۭا فَجَعَلْنَٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ

    और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही

  99. 99

    وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ

    तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ

  100. 100

    رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

    वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा

  101. 101

    فَبَشَّرْنَٰهُ بِغُلَٰمٍ حَلِيمٍۢ

    तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी

  102. 102

    فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّٰبِرِينَ

    फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे

  103. 103

    فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ

    फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया

  104. 104

    وَنَٰدَيْنَٰهُ أَن يَٰٓإِبْرَٰهِيمُ

    और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम

  105. 105

    قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं

  106. 106

    إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ

    इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था

  107. 107

    وَفَدَيْنَٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍۢ

    और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया

  108. 108

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है

  109. 109

    سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ

    कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं

  110. 110

    كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं

  111. 111

    إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे

  112. 112

    وَبَشَّرْنَٰهُ بِإِسْحَٰقَ نَبِيًّۭا مِّنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

    और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी

  113. 113

    وَبَٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌۭ وَظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌۭ

    जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला

  114. 114

    وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं

  115. 115

    وَنَجَّيْنَٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ

    और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

  116. 116

    وَنَصَرْنَٰهُمْ فَكَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَٰلِبِينَ

    और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे

  117. 117

    وَءَاتَيْنَٰهُمَا ٱلْكِتَٰبَ ٱلْمُسْتَبِينَ

    और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की

  118. 118

    وَهَدَيْنَٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ

    और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई

  119. 119

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    और बाद को आने वालों में उनका ज़िक्रे ख़ैर बाक़ी रखा

  120. 120

    سَلَٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ

    कि (हर जगह) मूसा और हारून पर सलाम (ही सलाम) है

  121. 121

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं

  122. 122

    إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    बेशक ये दोनों हमारे (ख़ालिस ईमानदार बन्दों में से थे)

  123. 123

    وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे

  124. 124

    إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते

  125. 125

    أَتَدْعُونَ بَعْلًۭا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ ٱلْخَٰلِقِينَ

    क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खुदा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है

  126. 126

    ٱللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ

    और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है

  127. 127

    فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ

    तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे

  128. 128

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे

  129. 129

    وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْءَاخِرِينَ

    और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा

  130. 130

    سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ

    कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है

  131. 131

    إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ

    हम यक़ीनन नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं

  132. 132

    إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ

    बेशक वह हमारे (ख़ालिस) ईमानदार बन्दों में थे

  133. 133

    وَإِنَّ لُوطًۭا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    और इसमें भी शक नहीं कि लूत यक़ीनी पैग़म्बरों में से थे

  134. 134

    إِذْ نَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ

    जब हमने उनको और उनके लड़के वालों सब को नजात दी

  135. 135

    إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَٰبِرِينَ

    मगर एक (उनकी) बूढ़ी बीबी जो पीछे रह जाने वालों ही में थीं

  136. 136

    ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْءَاخَرِينَ

    फिर हमने बाक़ी लोगों को तबाह व बर्बाद कर दिया

  137. 137

    وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ

    और ऐ अहले मक्का तुम लोग भी उन पर से (कभी) सुबह को और (कभी) शाम को (आते जाते गुज़रते हो)

  138. 138

    وَبِٱلَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ

    तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते

  139. 139

    وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

    और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे

  140. 140

    إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ

    (वह वक्त याद करो) जब यूनुस भाग कर एक भरी हुई कश्ती के पास पहुँचे

  141. 141

    فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ

    तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)

  142. 142

    فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌۭ

    तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे

  143. 143

    فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ

    फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते

  144. 144

    لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ

    तो रोज़े क़यामत तक मछली के पेट में रहते

  145. 145

    ۞ فَنَبَذْنَٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌۭ

    फिर हमने उनको (मछली के पेट से निकाल कर) एक खुले मैदान में डाल दिया

  146. 146

    وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةًۭ مِّن يَقْطِينٍۢ

    और (वह थोड़ी देर में) बीमार निढाल हो गए थे और हमने उन पर साये के लिए एक कद्दू का दरख्त उगा दिया

  147. 147

    وَأَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ

    और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)

  148. 148

    فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍۢ

    तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा

  149. 149

    فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ

    तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे

  150. 150

    أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِنَٰثًۭا وَهُمْ شَٰهِدُونَ

    (क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे

  151. 151

    أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ

    ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है

  152. 152

    وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَ

    और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं

  153. 153

    أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ

    क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है

  154. 154

    مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ

    (अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो

  155. 155

    أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

    तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते

  156. 156

    أَمْ لَكُمْ سُلْطَٰنٌۭ مُّبِينٌۭ

    या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है

  157. 157

    فَأْتُوا۟ بِكِتَٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ

    तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो

  158. 158

    وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًۭا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ

    और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे

  159. 159

    سُبْحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ

    ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है

  160. 160

    إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)

  161. 161

    فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ

    ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद

  162. 162

    مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَٰتِنِينَ

    उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते

  163. 163

    إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ

    मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है

  164. 164

    وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌۭ مَّعْلُومٌۭ

    और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है

  165. 165

    وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ

    और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं

  166. 166

    وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ

    और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं

  167. 167

    وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ

    अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे

  168. 168

    لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًۭا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ

    कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता

  169. 169

    لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ

    तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते

  170. 170

    فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ

    (मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा

  171. 171

    وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ

    और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है

  172. 172

    إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ

    कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी

  173. 173

    وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَٰلِبُونَ

    और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा

  174. 174

    فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ

    तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

  175. 175

    وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ

    और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे

  176. 176

    أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ

    तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं

  177. 177

    فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ

    फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी

  178. 178

    وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ

    और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

  179. 179

    وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ

    और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें

  180. 180

    سُبْحَٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ

    ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है

  181. 181

    وَسَلَٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ

    और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो

  182. 182

    وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

    और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है

अरबी: तंज़ील का उस्मानी पाठ। अनुवाद और ऑडियो मुफ़्त Al Quran Cloud / Islamic Network सेवाओं से। तफ़सीर ओपन Tafsir API से।