सूरह 111 · मक्की · 5 आयतें
सूरह अल-मसद
खजूर की रस्सी
سورة المسد
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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تَبَّتْ يَدَآ أَبِى لَهَبٍۢ وَتَبَّ
Tab bat yadaa abee Lahabinw-wa tabb
अबु लहब के हाथ टूट जाएँ और वह ख़ुद सत्यानास हो जाए
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مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُۥ وَمَا كَسَبَ
Maa aghna 'anhu maaluhu wa ma kasab
(आख़िर) न उसका माल ही उसके हाथ आया और (न) उसने कमाया
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سَيَصْلَىٰ نَارًۭا ذَاتَ لَهَبٍۢ
Sa yas laa naran zaata lahab
वह बहुत भड़कती हुई आग में दाख़िल होगा
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وَٱمْرَأَتُهُۥ حَمَّالَةَ ٱلْحَطَبِ
Wam ra-atuh hamma latal-hatab
और उसकी जोरू भी जो सर पर ईंधन उठाए फिरती है
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فِى جِيدِهَا حَبْلٌۭ مِّن مَّسَدٍۭ
Fee jeediha hab lum mim-masad
और उसके गले में बटी हुई रस्सी बँधी है
अरबी: तंज़ील का उस्मानी पाठ। अनुवाद और ऑडियो मुफ़्त Al Quran Cloud / Islamic Network सेवाओं से। तफ़सीर ओपन Tafsir API से।